How to proceed Kundalini Awakening 🧘♀️🪔🛕
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03/01/2024
उज्जैन में क्या क्या देखें
उज्जैन में सबसे मुख्य है वहां के राजा स्वयं महाकाल. इस मंदिर की उर्जा सच में दिव्य है. इसके अतिरिक्त जो दुसरें मंदिर मेरे अनुभव में है वो है – हरसिद्धि माँ मंदिर, काल भैरव मंदिर और द्वारकाधीश मंदिर. इन तीनों मंदिरों की उर्जा कमाल की है. पता तभी चलता है जब आप इन दोनों मंदिरों में थोडा समय बैठ कर ध्यान किया जाये.
सुबह अगर उज्जैन में पहुँच जाये तो आराम करने और तैयार होने के बाद सबसे पहले महाकाल के दर्शन करने जाएँ. आम दिनों में 1 घंटे में ही दर्शन हो जायेंगे क्यूंकि वहां दर्शन करने का इंतजाम बहुत ही अच्छा है.
महाकाल दर्शन के बाद पैदल चल कर द्वारकाधीश मंदिर में कुछ देर जा कर अवश्य बैठे. इसके लिए जब आप महाकाल मंदिर से दर्शन करके वापिस आ रहे होंगे तो बाहर जाने के लिए राईट की तरफ मुड़ जाये तो यह रास्ता महाकाल चौराहा पर लेकर जायेगा और यहाँ से कुछ ही दुरी पर द्वारकाधीश मंदिर है.
यहाँ दर्शन करने के बाद आप ऑटो रिक्शा या ई-रिक्शा लेकर उज्जैन दर्शन को निकल जाये. इसमें लगभग 100 रूपये प्रति सवारी का शुल्क लगता है. सीजन के दिनों में यह चार्ज कुछ बढ़ जाता है.
उज्जैन दर्शन में सबसे मुख्य काल भैरव मंदिर है. इसके अतिरिक्त ई रिक्शा आपको मंगल नाथ, संदीपनी आश्रम, भृतहरि गुफाएं, वट वृक्ष, काल भैरव लेकर जायेगा. यहाँ कौशिश करे कि सुबह जितनी जल्दी हो सके यह यात्रा कर ले क्यूंकि जितनी देर करेंगे तो काल भैरव पर उतनी अधिक भीड़ बढती जाएगी.
यहीं अगर आप लंच करना चाहे तो आपको बहुत अच्छा लंच इस एरिया में मिलेगा. यह यात्रा करके वापिस शहर में आकर थोडा आराम कर ले. शाम को राम घाट माँ क्षिप्रा के तट पर कुछ समय बिताएं. उसके बाद यही से पैदल चल कर हरसिद्धि माँ का अतिप्राचीन मंदिर है. यहाँ होने वाली रात की आरती जरुर से जरुर देखे. यहाँ मंदिर परिसर में बहुत अधिक भीड़ होती है इसलिए समय पर पहुँच कर अपनी जगह सुनिच्चित कर ले. ढोल नगाड़ों से ओत प्रोत यहाँ की आरती आपको मन्त्र मुग्ध कर देगी. यही आपको रात के 08:30 बज जायेंगे.
अब रात्रि का भोजन यही आस पास भी कर सकते है नहीं तो महाकाल चौराहा बेरीकेट्स के अंदर वाली रोड पर बहुत अच्छे भोजनालय है वहां भोजन करके फिर से महाकाल परिसर में आ जाएँ. रात को इस परिसर का नज़ारा भी अद्धभुत होता है. रात को यदि चाहे तो तो फिर से महाकाल के दर्शन भी कर सकते है. परिसर में लगभग आपको 2 घंटे के आस पास लग जायेंगे. उसके बाद उज्जैन के दूध का स्वाद भी जरुर चखे और इस तरह से आपका पूरा दिन बीत जायेगा.
4th नवरात्र पर हम अनाहत चक्र की साधना करते है. अनाहत चक्र की साधना में देवी की आराधना से पैदा हुई उर्जा को हम अनाहत चक्र तक लेकर आते है.
कई जगह नेगेटिव ऊर्जा लिए हुए होती है और उनसे बचना जरूरी होता है
चमत्कारों के भी कुछ नियम होते है। इन नियमों के पालन से ही हम चमत्कार कर सकते है। कैसे करते है, यह इस विडियो में समझाया गया गया है।
तीसरे नवरात्र पर मां चंद्रघंटा की आराधना कर मणिपुर चक्र जागृत किया जाता है।
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क्रिया योग एक ऐसी तकनीक है जिससे हम बड़ी आसानी से आध्यात्मिक मार्ग में आगे बढ़ सकते है।
दूसरे नवरात्रि पर मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान किया जाता है। स्वाधिष्ठान चक्र पर ध्यान किया जाता है। इस वीडियो में ध्यान करने की विधि बताई गई है।
नवरात्रि में ऐसे करे मूलाधार चक्र साधना। पहला नवरात्र पर मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है।
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एकाग्रता एक ऐसी शक्ति है जिस से कई तरह के चमत्कार किए जा सकते है। यह चमत्कार कैसे किए जाते है और इसके लिए क्या क्या करना होता है। यह इस वीडियो में बताया गया है।
28/04/2023
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