05/08/2026
ये कैसे रिश्ते? वृदाश्रम में मशहूर व्यापारी की मौत, मिलने नहीं आईं 3 बेटियां, VIDEO कॉल पर देखा अंतिम संस्कार।
आचार्य चाणक्य के अनुसार कलयुग में धन ही सबसे बड़ा बल है। जिसके पास पैसा है, उसी को समाज में गुणवान, ज्ञानी और सम्मानित व्यक्ति माना जाता है।
धनवान ही विद्वान: कलयुग में जिस मनुष्य के पास धन होता है, समाज उसे ही योग्य और ज्ञानी समझता है। गरीब व्यक्ति के ज्ञान का कोई मूल्य नहीं रहता।
सच्चे रिश्तों की परख: विपत्ति और संकट के समय ही सच्चे मित्र, भाई और जीवनसाथी की पहचान होती है।
रिश्तों से ऊपर स्वार्थ: इस युग में लोग स्वार्थ के लिए संबंध रखते हैं। जब तक काम है, तब तक अपनापन दिखाते है
कया फायदा ऐसी शोहरत का ,ऐसी संपत्ति का, शिक्षा का,जो हम आज की युवा पीढ़ी को दे रहे है कि पुत्र व बेटी के होते हुए भी मां व बाप को बुढापे मे ये दिन देखने को मिलते हैं।
समाज मे इस प्रकार की अनेकों घटनाएं घटित हो रही हैं, पर पैसों के बल पर सार्वजनिक नहीं हो पाती है।
बहुत ही निन्दनीय।
।। भागवत में लिखी ये बातें कलयुग में हो रही हैं सच ।।
ततश्चानुदिनं धर्मः सत्यं शौचं क्षमा दया। कालेन बलिना राजन् नङ्क्ष्यत्यायुर्बलं स्मृतिः ।। कलयुग में धर्म, स्वच्छता, सत्यवादिता, स्मृति, शारीरक शक्ति, दया भाव और जीवन की अवधि दिन-ब-दिन घटती जाएगी।
वित्तमेव कलौ नॄणां जन्माचारगुणोदयः। धर्मन्याय व्यवस्थायां कारणं बलमेव हि।। कलयुग में वही व्यक्ति गुणी माना जायेगा जिसके पास ज्यादा धन है। न्याय और कानून सिर्फ एक शक्ति के आधार पे होगा।
दाम्पत्येऽभिरुचि
अवृत्त्या न्यायदौर्बल्यं पाण्डित्ये चापलं वचः।। घूस देने वाले व्यक्ति ही न्याय पा सकेंगे और जो धन नहीं खर्च पायेगा उसे न्याय के लिए दर-दर की ठोकरे खानी होंगी।
आप भी इस विषय पर अपनी राय जरूर रखें।