Maghi Jhumar geet

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01/07/2026

लागता मेहरी हमार मिलल पगलेट हो { देहाती झुमर गीत } | Dehati Bhojpuri

01/07/2026

केकर_दिही_हो_कमाई_पियवा_रण्डी_रखले_बा___देहाती_झुमर_गीत_

30/06/2026

**✨ क्या आप जानते हैं कि एक वानर की भक्ति ने भगवान राम को जंगल में भी राजा बना दिया था?** ✨

रामायण का वह दिव्य और अत्यंत भावपूर्ण क्षण जब लंका विजय के बाद भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण वन के मार्ग से अयोध्या लौट रहे थे। घने जंगलों के बीच, जहां सूर्यास्त की सुनहरी किरणें पेड़ों से छनकर आ रही थीं, एक पावन स्थल पर राम जी सिंहासन पर विराजमान थे। उनके दाहिने ओर माता सीता सुंदर मुस्कान के साथ बैठी थीं और बाएँ ओर लक्ष्मण जी हाथ जोड़े खड़े थे।

हनुमान जी उनके सामने घुटनों के बल बैठे थे। उनके हाथ जोड़े हुए थे, सिर झुका हुआ था और चेहरे पर अपार समर्पण की ज्योति चमक रही थी। राम जी ने स्नेह से उन्हें देखा और बोले, “अंजनेय! उठो। तुम मेरे भक्त नहीं, मेरे परिवार हो। तुमने समुद्र लाँघा, लंका जलाई, संजीवनी लाई और कभी कुछ माँगा नहीं। तुम्हारी निश्छल भक्ति ने जंगल को भी दरबार बना दिया है।”

हनुमान जी की आँखें नम हो गईं। उन्होंने कहा, “प्रभु! आपके चरणों में ही मेरा सिंहासन है। मैं वानर हूँ, आपका दास हूँ। आपके बिना मेरा कोई अस्तित्व नहीं। मैं कलियुग तक आपके भक्तों की रक्षा करूँगा।” माता सीता ने आशीर्वाद दिया, “बेटा, तुम्हारी भक्ति अमर रहेगी।” लक्ष्मण जी ने भी हनुमान जी को गले लगाया।

राम जी ने हनुमान जी के सिर पर हाथ रखा और कहा, “पवनपुत्र! आज से तुम ‘संकटमोचन’ कहलाओगे। तुम्हारी गदा हर बुराई को कुचलेगी और तुम्हारा नाम हर भक्त के हृदय में बस जाएगा।” उस क्षण पूरा जंगल राम नाम से गूँज उठा। पक्षी चहकने लगे, फूल बरसने लगे और हवा भी राम भक्ति में लीन हो गई।

यह दृश्य भक्ति, प्रेम और समर्पण का अनुपम प्रतीक है। हनुमान जी ने दिखा दिया कि सच्चा समर्पण किसी महल या सिंहासन की जरूरत नहीं रखता। जंगल भी उनके लिए दरबार बन गया। उन्होंने कभी पद, सम्मान या राज्य नहीं माँगा। उन्होंने केवल राम का नाम माँगा।

आज भी जब भक्त इस दिव्य चित्र को देखते हैं — जंगल की शांति में राम-सीता-लक्ष्मण का सुंदर स्वरूप और सामने हनुमान जी का समर्पण — उनके मन में अपार शांति, विश्वास और भक्ति जागृत हो जाती है। यह हमें सिखाता है कि जीवन में चाहे कितने भी संकट आएँ, अगर हनुमान जैसी भक्ति हो तो राम जी स्वयं हमारे साथ होंगे।

हनुमान जी हर भक्त से कहते हैं — “राम नाम जपो, समर्पण करो, मैं सदा तुम्हारी रक्षा करूँगा।” उनकी यह निश्छल भक्ति कलियुग तक हर संकटमोचन बनी रहेगी।

**जय श्री राम! जय सीता राम! जय हनुमान! 🙏**

29/06/2026

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