23/07/2026
सच को आईना दिखाती एक viral तस्वीर...
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23/07/2026
सच को आईना दिखाती एक viral तस्वीर...
19/06/2026
वेतन और भत्तों में असमानता के कारण डॉक्टर्स कर रहे हैं रिजाइन...लखनऊ के चक गंजरिया स्थित कल्याण सिंह कैंसर संस्थान में डॉक्टरों के इस्तीफे का सिलसिला थम नहीं रहा है। अब न्यूरो सर्जरी विभाग के एक और डॉक्टर ने संस्थान से किनारा कर लिया है। नियमित चिकित्सक डॉ. मयंक सिंह ने नौकरी छोड़ दी है। SGPGI में सेलेक्शन के बाद उन्होंने रिजाइन कर दिया। इससे दिमाग में ट्यूमर, ब्रेन कैंसर और जटिल न्यूरो संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की मुश्किलें बढ़ने की संभावना है।
कैंसर संस्थान में कुल 32 नियमित डॉक्टर हैं। आठ बांड के तहत डॉक्टर तैनात हैं। जबकि एक महिला डॉक्टर कानपुर से प्रतिनियुक्त पर हैं। कुल 41 डॉक्टर हैं। न्यूरो सर्जरी विभाग में अभी तक तीन नियमित व दो बांड के तहत डॉक्टर तैनात थे। इनमें नियमित डॉ. मयंक सिंह ने नौकरी छोड़ दी है। उनका पीजीआई में चयन हो गया है।
कैंसर संस्थान के 11 विभागों में एक भी डॉक्टर नहीं है। इन विभागों में न तो कोई जांच हो रही है न ही इलाज। जबकि डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं। कई विभागों में तो करोड़ों की मशीन हैं। जो कि ताले में बंद धूल फांक रही हैं। मेडिकल आंकोलॉजी, मेडिकल फिजिस्स, डेंटेस्ट्री, न्यूक्लीयर मेडिसिन, बायोकेमेस्ट्री, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन, पैलिएटिव केयर, पीएमआर, त्वचा, हीमैटोलॉजी व रेडियोडायग्नोसिस विभाग है।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में मरीज और उनके तीमारदार हर दिन उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं। ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे मरीजों में कई ऐसे होते हैं, जिनमें समय पर सर्जरी न होने पर बीमारी तेजी से बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टर की कमी मरीजों की परेशानी को और बढ़ा सकती है। कैंसर संस्थान से अब तक 28 से ज्यादा डॉक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं। वहीं कई अन्य डॉक्टर भी संस्थान छोड़ने की तैयारी में हैं। लगातार हो रहे पलायन से संस्थान की कई महत्वपूर्ण सेवाओं पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
डॉक्टरों की नाराजगी की बड़ी वजह वेतन और भत्तों में असमानता बताई जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि केजीएमयू, पीजीआई व लोहिया संस्थान में तैनात डॉक्टरों और कैंसर संस्थान के विशेषज्ञों की योग्यता समान है। लेकिन वेतन-भत्तों में अंतर है। यही वजह है कि कई विशेषज्ञ लंबे समय से अपनी मांगें उठा रहे हैं। विशेषज्ञों के जाने का असर सीधे मरीजों पर पड़ रहा है। दूर-दराज जिलों से आने वाले कैंसर मरीजों को तारीख मिलने का इंतजार करना पड़ता है। कई मरीज ऐसे भी हैं, जिनके लिए हर गुजरता दिन बीमारी के बढ़ने का खतरा लेकर आता है।
18/06/2026
फिरोजाबाद में बैंक ऑफ इंडिया (BOI) के ब्रांच में गोल्ड लोन के बदले ग्राहकों की ओर से गिरवी रखे गए 96 सोने के पैकेट तिजोरी से गायब मिले।
इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब बैंक का एक स्टाफ बिना किसी सूचना के 17 दिन से गायब चल रहा था। इसकी सूचना मैनेजर ने आगरा जोनल कार्यालय को दी। जोनल कार्यालय के अधिकारी जब बैंक पहुंचकर डुप्लीकेट चाभी से तिजोरी खोली तो 96 सोने के पैकेट गायब मिले। इसके बाद मुख्य प्रबंधक ने बैंक के तीन अधिकारियों के खिलाफ गबन और धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज करवाया। पुलिस ने गुरुवार की दोपहर तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उनके पास से पीली धातु की एक करधनी और दो दस्ती बरामद हुई।
इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया। यह घटना जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर अरांव थाना क्षेत्र की है।
18/06/2026
लखीमपुर में एक करोड़ के सोने के जेवर बारिश में खराब हो गए। बाकी बचे जेवरों को बंदर उठा ले गए। यह तर्क सदर कोतवाली की पुलिस ने कोर्ट में दिया। मामला 19 साल पुराना दहेज हत्या का है। कोर्ट ने आरोपी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसे बरी किया था। पुलिस को जब्त जेवरों को ससुराल वालों को सौंपने के निर्देश दिए थे, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि जेवरों से भीगी पोटली को मालखाने की छत पर सुखाने के लिए रखा था. ज्यादातर जेवर भीगने से खराब होकर गल गए। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा- लग रहा जेवरों को पुलिसकर्मियों ने अपने हित में प्रयोग किया...
किसके किसके शहर/गाँव में बिजली की दिक्कत हो रही है? कमेंट में बताइये कहाँ पर कितने घंटे बिजली आती है..
सिस्टम के दीमक Vs कॉकरोच
जब एक कॉकरोच सिस्टम के दीमकों से भिड़ गया..
09/05/2026
भास्कर रिपोर्टर: क्या आपके पास नाबालिग लड़कियां हैं?
सफलता पाठक: वो, आप हम पर छोड़ दीजिए। पहले डिटेल दीजिए, बाकी मैं यहां बैठकर सब पता कर सकती हूं। काम हो जाएगा, मुझे पूरा भरोसा है।
रिपोर्टर: काम में समय कितना लगेगा?
सफलता पाठक: डिटेल और क्लाइंट से मुलाकात के बाद बता दूंगी।
रिपोर्टर: मोटेतौर पर खर्च कितना आएगा?
सफलता पाठक: बता दूंगी। 376 (रेप केस) तो हमारे लिए नॉर्मल है। चाहे कुछ हुआ हो या नहीं, लगवा देंगे।
रिपोर्टर: क्या पुलिस से सेटिंग है?
सफलता पाठक: मैं किसी भी थाने में FIR लिखवा दूंगी।
ये सब राजधानी लखनऊ में हो रहा। रेप केस में फंसाने के लिए सफलता पाठक जैसों ने गैंग बना रखी है। पुलिस इनके इशारे पर काम करती है। दैनिक भास्कर पर यह स्टिंग छपी है। देख व पढ़ सकते हैं। लिंक कमेंट बॉक्स में है।
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14/03/2026
प्रीपेड व्यवस्था लागू होते ही कटी 67 हज़ार लोगों की बिजली!
Big Breaking!
इंग्लैंड ने श्रीलंका को 51 रन से हराया...147 रन का दिया था लक्ष्य लेकिन 95 रन पर ही किया आलआउट
21/02/2026
मध्य प्रदेश विधानसभा में हाल ही में सामने आए आंकड़े महिला सुरक्षा के मामले में चिंता पैदा कर रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 6 साल में प्रदेश से लगभग 2 लाख महिलाएं और 65 हजार बच्चियां गायब हो चुकी हैं। यह संख्या न केवल बड़े शहरों जैसे इंदौर और भोपाल से बल्कि धार, झाबुआ, अलीराजपुर जैसे आदिवासी अंचलों से भी सामने आई है।
कांग्रेस विधायक और राष्ट्रीय अध्यक्ष आदिवासी कांग्रेस डॉ. विक्रांत भूरिया ने इस मामले में सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा के प्रति सरकार लापरवाह रही है। उन्होंने बताया कि गायब हुई महिलाओं में से अब तक लगभग 50 हजार महिलाएं और बच्चियां वापस नहीं मिली हैं। इसके चलते उन्होंने विशेष कमेटी बनाने की मांग की है, जो इन गायब होने वाली महिलाओं और बच्चियों के मामलों की गहन जांच कर सके।
महिला गायब होने के पीछे किसका हाथ ?
डॉ. भूरिया के अनुसार, मध्य प्रदेश में महिला गायब होने के मामले अंतरराष्ट्रीय गिरोह से भी जुड़े होने की आशंका है। उनका कहना है कि बड़े पैमाने पर काम कर रहे इस गिरोह में कई प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने विधानसभा में सवाल उठाते हुए प्रदेश सरकार को कठोर कार्रवाई के लिए कहा। हालांकि, इस आंकड़े को लेकर राज्य सरकार के पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने इसे भ्रामक बताया। उनका कहना है कि इस आंकड़े में कोई दम और सच्चाई नहीं है और इसे आधार मानकर किसी तरह का फैसला लेना ठीक नहीं होगा।
अगर यह आंकड़े सही हैं, तो यह महिला सुरक्षा की दृष्टि से एक गंभीर चेतावनी है और राज्य सरकार को त्वरित और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा, उनके लापता होने के मामलों की जांच और अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़े संभावित मामलों की पहचान करना अब सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।