01/09/2026
AWGP- LITERATURE GURUDEV
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
युग निर्माण सत्-संकल्प की दिशा-धारा
9. अनीति से प्राप्त सफलता की अपेक्षा नीति पर चलते हुए असफलता को शिरोधार्य करेंगे।
अर्थ (विस्तार से):
हम मानते हैं कि यदि सफलता गलत रास्ते से मिली हो तो वह कोई सफलता नहीं। हमें ईमानदारी से काम करना चाहिए, भले ही असफलता ही क्यों न मिले।
अनुकरण की प्रक्रिया:
किसी भी परिस्थिति में नकल या धोखा नहीं दें।
अपने कार्यों में सत्यता और ईमानदारी रखें।
असफलता से न डरें, बल्कि उसे सीखने और सुधारने के अवसर के रूप में लें।
10. मनुष्य के मूल्यांकन की कसौटी उसकी सफलताओं, योग्यताओं एवं विभूतियों को नहीं, उसके सद्विचारों और सत्कर्मों को मानेंगे।
अर्थ (विस्तार से):
हम किसी व्यक्ति को उसकी सफलता या संपत्ति से नहीं, बल्कि उसके अच्छे विचारों और अच्छे कार्यों से मापेंगे।
अनुकरण की प्रक्रिया:
अपने व्यक्तिगत जीवन में दूसरों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करें।
कभी भी किसी को उसके सफलता के आधार पर न आंकें।
अपने विचार और कार्यों को सही दिशा में रखें ताकि समाज में योगदान दे सकें।
क्रमशः ........
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हम आस्तिकता और कर्तव्यपरायणता को मानव जीवन का धर्म कर्तव्य मानेंगे। - हम आस्तिकता और कर्तव्यपरायणता को मानव जीवन ....
01/09/2026
सिर और नाक की बनावट क्या कहती है?
क्या किसी व्यक्ति के सिर और नाक की बनावट देखकर उसके स्वभाव का अनुमान लगाया जा सकता है?
चेहरा केवल हमारी बाहरी पहचान है; वास्तविक व्यक्तित्व हमारे विचारों, संस्कारों और कर्मों से प्रकट होता है।
31/08/2026
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ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
युग निर्माण सत्-संकल्प की दिशा-धारा
7. समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी को जीवन का एक अविच्छिन्न अंग मानेंगे।
अर्थ (विस्तार से):
हमारे जीवन का हर कदम समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी पर आधारित होना चाहिए।
अनुकरण की प्रक्रिया:
हर निर्णय में बुद्धिमानी का पालन करें।
किसी भी स्थिति में ईमानदार रहें, चाहे स्थिति कैसी भी हो।
अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए पूरी मेहनत करें।
साहसिक कार्य करें, जैसे समाज में सुधार लाने के लिए आवाज उठाना।
8. चारों ओर मधुरता, स्वच्छता, सादगी एवं सज्जनता का वातावरण उत्पन्न करेंगे।
अर्थ (विस्तार से):
हमारे कार्यों और व्यवहार से एक सकारात्मक, शुद्ध और सज्जन वातावरण बनना चाहिए।
अनुकरण की प्रक्रिया:
रोज़ किसी से भी मिलें, तो उनका स्वागत मुस्कान और सौम्यता से करें।
अपने घर और कार्यस्थल को स्वच्छ रखें।
सादगी में ही सुंदरता है, यह समझें और उसी के अनुसार अपना जीवन जीएं।
सज्जनता से व्यवहार करें और किसी को भी आहत न करें।
क्रमशः ........
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31/08/2026
गीता का कर्मयोग
जब फल हमारे हाथ में नहीं है, तो क्या हमें कर्म करना छोड़ देना चाहिए?
कर्तव्य समझकर कर्म करते रहो, फल भगवान को अर्पित करो और कभी आलस्य को अध्यात्म मत समझो।
30/08/2026
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ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
युग निर्माण सत्-संकल्प की दिशा-धारा
5. अपने आपको समाज का एक अभिन्न अंग मानेंगे और सबके हित में अपना हित समझेंगे।
अर्थ (विस्तार से):
हम खुद को समाज का हिस्सा मानते हैं, और इसलिए समाज के भले के लिए काम करना हमारा कर्तव्य है। दूसरों के भले में ही हमारा भला है।
अनुकरण की प्रक्रिया:
समाज में किसी भी असमानता या अन्याय को देख कर चुप न रहें।
सामूहिक कार्यों में भाग लें और दूसरों की मदद करें।
किसी जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करें, चाहे वह समय, ऊर्जा या धन से हो।
समाज में बदलाव लाने के लिए अपने कर्तव्यों का पालन करें।
6. मर्यादाओं को पालेंगे, वर्जनाओं से बचेंगे, नागरिक कर्तव्यों का पालन करेंगे और समाजनिष्ठ बने रहेंगे।
अर्थ (विस्तार से):
हम मर्यादाओं और सामाजिक नियमों का पालन करेंगे। समाज के नियमों का उल्लंघन करना हमें नहीं चाहिए।
अनुकरण की प्रक्रिया:
अपने कर्तव्यों का पालन करें, जैसे चुनाव में वोट डालना, कानून का सम्मान करना आदि।
सामाजिक मर्यादाओं का पालन करें, जैसे अनुशासन, सम्मान, और शिष्टाचार का ध्यान रखें।
किसी गलत कार्य को देख कर चुप न रहें, उसका विरोध करें।
अपने व्यवहार और कार्यों में समाज के हित को ध्यान में रखें।
क्रमशः ........
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30/08/2026
बड़ा कौन—गुलाब या कटैला?
सुंदरता और प्रशंसा का अभिमान इतना मत कीजिए कि आपको अपने सामने हर दूसरा व्यक्ति तुच्छ दिखाई देने लगे!
अपने गुणों पर गर्व कीजिए, लेकिन उनके कारण किसी दूसरे के अस्तित्व का अपमान मत कीजिए।