23/08/2026
“आरक्षण मुर्दाबाद” UGC Rollback — 23 अगस्त आज एक बार फिर जंतर-मंतर की तैयारी, ज्यादा से ज्यादा लोग समर्थन करें और जंतर-मंतर पहुँचें! ✊💥
23 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर UGC Rollback और आरक्षण सुधार की मांग को लेकर प्रस्तावित आंदोलन के लिए लोगों से समर्थन की अपील की जा रही है। इस अभियान का उद्देश्य शिक्षा और रोजगार से जुड़े अवसरों में समानता, पारदर्शिता और सभी वर्गों के लिए निष्पक्ष व्यवस्था की मांग को सामने रखना है। आंदोलन से जुड़े समर्थकों का कहना है कि देश में नीतियों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए और युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
आज जंतर-मंतर पर अपनी आवाज लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से रखने की तैयारी है। जो लोग इस मुद्दे को महत्वपूर्ण मानते हैं, वे अपनी सहमति और समर्थन शांतिपूर्ण तरीके से व्यक्त कर सकते हैं। आंदोलन में शामिल होने वाले प्रत्येक व्यक्ति से अपील है कि कानून-व्यवस्था का सम्मान करें, किसी भी व्यक्ति या समुदाय के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग न करें और अपनी बात संविधान तथा लोकतांत्रिक अधिकारों के दायरे में रखें।
“आरक्षण मुर्दाबाद” और “UGC Rollback” जैसे नारे आंदोलन के समर्थकों की भावनाओं को व्यक्त कर सकते हैं, लेकिन किसी भी संघर्ष का उद्देश्य समाज में नफरत फैलाना नहीं बल्कि नीतियों पर संवाद और सुधार की मांग रखना होना चाहिए। देश के युवाओं, विद्यार्थियों और नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार और संबंधित संस्थाओं को भी लोगों की बात सुननी चाहिए।
23 अगस्त को जंतर-मंतर पर होने वाली गतिविधि के लिए ज्यादा से ज्यादा लोग अपने विचार साझा करें और लोकतांत्रिक तरीके से समर्थन दें। यदि आप इस मुद्दे से सहमत हैं तो अपनी राय कमेंट में लिखें और अन्य लोगों तक भी जानकारी पहुँचाएं।
आइए, अपनी बात मजबूती से रखें, लेकिन शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से।
UGC Rollback और आरक्षण सुधार की मांग पर संवाद हो, युवाओं की आवाज सुनी जाए और समान अवसर पर गंभीर चर्चा हो। ✊💥
ज्यादा से ज्यादा लोग समर्थन करें और जंतर-मंतर पहुँचें!
#ब्राह्मणबाबा #ब्राह्मण_बाबा
23/08/2026
“सवर्ण समाज ‘आरक्षण’ खत्म करने की मांग करने वाले लोग देशद्रोही लोग हैं, इनके ऊपर एक्शन होनी चाहिए।” — रामदास आठवले (मोदी सरकार में मंत्री)
यह बयान आरक्षण को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला देता है। आरक्षण व्यवस्था भारत में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को अवसर देने के उद्देश्य से बनाई गई थी। वहीं दूसरी ओर, सवर्ण समाज के कुछ लोग लंबे समय से मांग करते रहे हैं कि आरक्षण की व्यवस्था की समीक्षा हो और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को भी समान अवसर मिलना चाहिए।
आरक्षण समाप्त करने या उसमें बदलाव की मांग करने वाले हर व्यक्ति को “देशद्रोही” कहना उचित है या नहीं, यह स्वयं एक गंभीर बहस का विषय है। लोकतंत्र में किसी नीति का विरोध करना अपने-आप में देशविरोध नहीं माना जा सकता। नागरिकों को संविधान के दायरे में अपनी बात रखने, प्रदर्शन करने और सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है।
सवर्ण समाज के लोगों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी जाति या समुदाय के अधिकार छीनना नहीं, बल्कि शिक्षा और रोजगार में ऐसी व्यवस्था की मांग करना है जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी पर्याप्त अवसर मिलें। उनका तर्क है कि गरीबी किसी एक जाति तक सीमित नहीं है और जरूरतमंद परिवारों की सहायता सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर होनी चाहिए।
दूसरी तरफ, आरक्षण के समर्थकों का मानना है कि केवल आर्थिक आधार सामाजिक भेदभाव और ऐतिहासिक असमानता की पूरी तस्वीर नहीं बताता। इसलिए आरक्षण व्यवस्था को लेकर अलग-अलग समुदायों की अपनी-अपनी चिंताएं और तर्क हैं।
ऐसे संवेदनशील विषय पर समाज में तनाव बढ़ाने के बजाय तथ्यों, संविधान और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संवाद के माध्यम से चर्चा होनी चाहिए। सरकार और राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वे सभी वर्गों की बात सुनें और ऐसी नीतियां बनाएं जिनसे योग्य युवाओं को अवसर मिले तथा कमजोर वर्गों को आवश्यक संरक्षण भी मिलता रहे।
अगर आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग उठती है, तो उस पर संसद, न्यायपालिका और विशेषज्ञों के स्तर पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। किसी भी आंदोलन या मांग का मूल्यांकन उसके विचारों और संवैधानिक तरीके से होना चाहिए, न कि केवल उसके समर्थकों की जाति के आधार पर।
आपकी राय क्या है—आरक्षण व्यवस्था में सुधार होना चाहिए, वर्तमान व्यवस्था जारी रहनी चाहिए या आर्थिक आधार को भी अधिक महत्व दिया जाना चाहिए? अपनी राय शांतिपूर्ण और सम्मानजनक तरीके से कमेंट में जरूर लिखें।
#ब्राह्मणबाबा #ब्राह्मण_बाबा
21/08/2026
शहीद कालीचरण तिवारी उन्हीं वीर योद्धाओं में से एक थे, जिनकी शौर्यगाथा आज भी हर देशवासी के लिए प्रेरणा है। महज 22 वर्ष की उम्र में उन्होंने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मन की गोलियों के बीच वे अपने मोर्चे पर डटे रहे और 12 गोलियां लगने के बावजूद मैदान नहीं छोड़ा।
कालीचरण तिवारी का जन्म सागर, मध्य प्रदेश में हुआ था। उनके परिवार में भी सेना से जुड़ाव था। बचपन से ही उनके मन में देशसेवा और सेना में जाने का सपना था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सुरक्षा का संकल्प लिया। वे 12 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे।
साल 1999 में कारगिल युद्ध की परिस्थितियां बेहद गंभीर थीं। उस समय कालीचरण छुट्टी पर अपने घर सागर आए हुए थे। लेकिन जैसे ही उन्हें सीमा पर युद्ध की गंभीर स्थिति का पता चला, उनका मन घर में नहीं लगा। परिवार के अनुसार उनका मानना था कि जब देश को उनकी जरूरत है, तब उनका घर पर रहना उचित नहीं है। उन्होंने अपनी छुट्टी रद्द कराई और वापस ड्यूटी पर जाने का फैसला किया।
यह फैसला आसान नहीं था। एक तरफ घर-परिवार था और दूसरी तरफ देश की पुकार। कालीचरण ने देश को चुना। परिवार से विदा लेते समय उन्होंने ऐसी बातें कहीं, जिन्हें आज भी उनके परिजन भावुक होकर याद करते हैं। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने जाते समय परिवार के पैर छुए और यह भी कहा कि शायद अब मुलाकात न हो पाए।
कारगिल के मोर्चे पर पहुंचने के बाद कालीचरण तिवारी ने अदम्य साहस का परिचय दिया। एक सर्च ऑपरेशन में वे 22 जवानों की टीम के साथ सबसे आगे चल रहे थे। दुश्मन की तरफ से गोलीबारी शुरू हुई, लेकिन उन्होंने अपने साथियों का साथ नहीं छोड़ा और मुकाबला जारी रखा।
दुश्मन की गोलियां उनके शरीर को छलनी करती रहीं, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा। उपलब्ध रिपोर्टों में बताया गया है कि उनके सीने पर 12 गोलियां लगीं, फिर भी उन्होंने अपना मोर्चा नहीं छोड़ा। आखिरकार मातृभूमि की रक्षा करते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए।
शहीद कालीचरण तिवारी को शत-शत नमन।
मातृभूमि के इस वीर सपूत को कोटि-कोटि श्रद्धांजलि। 🇮🇳🙏
#ब्राह्मणबाबा #ब्राह्मण_बाबा
19/08/2026
UGC Rollback पर अपनी आवाज़ जरूर उठाएं
21 से 30 करोड़ जैसे बड़े आंकड़ों की बात करने से पहले हमें यह समझना चाहिए कि किसी भी मुद्दे पर समर्थन केवल संख्या से नहीं, बल्कि जागरूकता और विचारों से मजबूत होता है। UGC से जुड़े नियमों और आरक्षण की नीतियों को लेकर अगर आपके मन में कोई सवाल, असहमति या सुझाव है, तो उसे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से सामने रखना आपका अधिकार है।
अगर आप UGC Rollback की मांग का समर्थन करते हैं, तो अपनी आवाज़ जरूर दर्ज करें। केवल चुप रहने से किसी नीति पर आपकी राय स्पष्ट नहीं होती। सोशल मीडिया पर एक साधारण टिप्पणी—“UGC Rollback”—आपकी व्यक्तिगत राय को सामने रखने का एक तरीका हो सकती है।
लेकिन किसी व्यक्ति को उसकी जाति, समुदाय या पहचान के आधार पर “दोगला” कहना उचित नहीं है। एक ही समुदाय के भीतर भी अलग-अलग विचार हो सकते हैं। किसी का समर्थन करना या विरोध करना प्रत्येक व्यक्ति का अपना लोकतांत्रिक अधिकार है। इसलिए हमारा उद्देश्य किसी समाज को बांटना नहीं, बल्कि जिस नीति पर आपत्ति है उसके बारे में खुली और तथ्यात्मक चर्चा करना होना चाहिए।
जो लोग UGC में बदलाव या Rollback चाहते हैं, वे स्पष्ट करें कि उन्हें किस नियम या प्रावधान पर आपत्ति है और क्यों। साथ ही, जो लोग वर्तमान व्यवस्था के पक्ष में हैं, वे भी अपने तर्क सामने रखें। मजबूत लोकतंत्र में असहमति के लिए भी जगह होती है।
यदि आप UGC Rollback के समर्थन में हैं, तो अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं और अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखें। किसी पर दबाव डालने की जरूरत नहीं है और न ही किसी समुदाय के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए।
आपका समर्थन आपकी अपनी आवाज़ है।
अगर आप UGC Rollback की मांग से सहमत हैं, तो कमेंट में लिखें—“UGC Rollback”।
#ब्राह्मणबाबा #ब्राह्मण_बाबा
19/08/2026
— समर्थन में कौन-कौन?
21 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाला आंदोलन अपनी बात को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से रखने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन बड़ी संख्या में लोग अपनी मांगों और विचारों को लेकर एकजुट होने की तैयारी कर रहे हैं। यह केवल दिल्ली तक सीमित रहने वाला कार्यक्रम नहीं, बल्कि देशभर के लोगों का ध्यान आकर्षित करने वाला आयोजन बनने की उम्मीद है।
आंदोलन में शामिल होने वाले लोगों का उद्देश्य अपनी आवाज़ को मजबूती से सामने रखना और सरकार तथा संबंधित संस्थाओं तक अपनी मांग पहुंचाना है। लोकतंत्र में अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन यह भी हमारी जिम्मेदारी है कि विरोध शांतिपूर्ण रहे, कानून-व्यवस्था का सम्मान किया जाए और किसी व्यक्ति या समुदाय के खिलाफ नफरत या हिंसा का रास्ता न अपनाया जाए।
21 अगस्त को जंतर-मंतर पर देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले लोग अपनी एकजुटता का परिचय देंगे। यह दिन उन सभी लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है जो अपने अधिकारों, नीतियों और व्यवस्था में सुधार को लेकर अपनी बात रखना चाहते हैं। आंदोलन की असली ताकत संख्या से ज्यादा अनुशासन, शांतिपूर्ण व्यवहार और स्पष्ट मांगों में होती है।
अगर आप इस अभियान के समर्थन में हैं, तो अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से सामने रखें। बोल सकते हैं तो अपनी आवाज़ उठाइए, लिख सकते हैं तो अपनी बात लिखिए और सोशल मीडिया पर जानकारी साझा कर सकते हैं तो दूसरों तक पहुंचाइए। लेकिन किसी भी पोस्ट को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता और कार्यक्रम से जुड़ी आधिकारिक जानकारी जरूर जांच लें।
21 अगस्त का संदेश साफ होना चाहिए—अपनी बात रखो, लोकतांत्रिक तरीके से रखो और शांतिपूर्ण तरीके से रखो। देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले नागरिक जब एक मंच पर अपनी बात रखते हैं, तो उनकी आवाज़ को गंभीरता से सुना जाना लोकतंत्र की मजबूती का हिस्सा है।
जंतर-मंतर पर होने वाला यह कार्यक्रम देश और दुनिया का ध्यान आकर्षित करे, इसके लिए जरूरी है कि इसमें शामिल हर व्यक्ति कानून का पालन करे, किसी प्रकार की हिंसा या भड़काऊ नारेबाजी से बचे और अपनी मांगों को तथ्यों के साथ प्रस्तुत करे।
21 अगस्त — जंतर-मंतर।
अपनी बात, अपनी आवाज़, लोकतांत्रिक तरीके से।
अगर आप भी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के पक्ष में हैं, तो इस संदेश को आगे बढ़ाइए और दूसरों को भी कार्यक्रम की सही जानकारी दीजिए।
#ब्राह्मणबाबा #ब्राह्मण_बाबा
19/08/2026
नीम करोली बाबा के आश्रम और उनके भक्तों के बीच “सीताराम” नाम जपने से जुड़े अनगिनत चमत्कारिक प्रसंग प्रचलित हैं, जिनमें से एक प्रमुख घटना एक बीमार भक्त की है। गंभीर रूप से अस्वस्थ और डॉक्टरों द्वारा जवाब दिए जा चुके एक भक्त को जब महाराज जी ने केवल निरंतर “सीताराम” नाम का मानसिक और वाचिक जप करने का आदेश दिया, तो एक अद्भुत चमत्कार हुआ। जैसे-जैसे उस भक्त ने पूरी श्रद्धा और तन्मयता से नाम जपना शुरू किया, वैसे-वैसे उसकी चेतना बदलने लगी और बिना किसी विशेष चिकित्सा के, वह असाध्य रोग से पूरी तरह मुक्त हो गया। महाराज जी ने इस घटना से सिद्ध किया कि जब कोई अनन्य भाव से “सीताराम” जपता है, तो वह नाम सीधे प्राणशक्ति बनकर शरीर और मन के समस्त विकारों व कष्टों को समूल नष्ट कर देता है। सीताराम......🌸📿 . . . ✨
15/08/2026
अब जाति के नाम पर राजनीति करने वालों से सवाल
गोरखपुर के सिकरीगंज थाना क्षेत्र के अहिरौली में शिवकुमार त्रिपाठी हत्याकांड में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में आशुतोष चौधरी, बिंदनिवास चौधरी, राहुल चौधरी और भानू चौधरी शामिल हैं। पुलिस ने आशुतोष चौधरी के पास से एक तलवार बरामद करने की भी बात कही है।
अब उन नेताओं से सवाल है जो जाट, ओबीसी, एससी-एसटी और जाति के नाम पर राजनीति करते हैं—
ऐसी घटना पर आपकी आवाज़ कहाँ है?
क्या न्याय की आवाज़ भी जाति देखकर उठेगी?
शिवकुमार त्रिपाठी के परिवार को न्याय मिलना चाहिए और दोष सिद्ध होने पर दोषियों को कानून के अनुसार कठोर सजा मिलनी चाहिए।
अब अपना मुंह खोलिए—इंसाफ सबके लिए बराबर है या जाति देखकर?
#शिवकुमारत्रिपाठी #सिकरीगंज #गोरखपुर #न्याय #जातिकी राजनीति #ओबीसी #एससीएसटी #जाट #गोरखपुरपुलिस #उत्तरप्रदेश
ABP News Republic
12/08/2026
भरत तिवारी मामले में अब एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। आरा कोर्ट ने मामले में नामजद SDM जगदीशपुर, SDPO, थाना प्रभारी समेत 11 आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर आदेश दिया है। यह आदेश भरत तिवारी मामले में न्याय की मांग कर रहे लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भरत तिवारी मामले को लेकर लंबे समय से न्याय की मांग उठती रही है। परिवार और समर्थकों की ओर से लगातार यह मांग की जाती रही कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिन लोगों के खिलाफ आरोप हैं, उनके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। अब अदालत के आदेश के बाद इस मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद बढ़ गई है।
आरा कोर्ट द्वारा 12 अगस्त से पहले आरोपियों की गिरफ्तारी का आदेश दिए जाने की बात सामने आई है। आदेश में SDM जगदीशपुर, SDPO और थाना प्रभारी सहित कुल 11 आरोपियों का उल्लेख बताया जा रहा है। अदालत का यह आदेश इस बात को रेखांकित करता है कि भरत तिवारी मामले को कानूनी प्रक्रिया के तहत गंभीरता से देखा जा रहा है।
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि किसी भी आरोपी को दोषी तभी माना जा सकता है जब न्यायालय में आरोप सिद्ध हों। गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया कानून का हिस्सा हैं, जबकि अंतिम दोषसिद्धि अदालत के निर्णय से ही होती है। इसलिए भरत तिवारी मामले में भी आगे की पूरी कार्रवाई कानून और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए।
भरत तिवारी के परिवार और मामले से जुड़े लोगों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है। उनकी सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, सभी तथ्यों को सामने लाया जाए और यदि किसी व्यक्ति की भूमिका कानून के विरुद्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई हो।
अदालत के इस आदेश के बाद अब सभी की नजर 12 अगस्त पर रहेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आदेश के अनुपालन में संबंधित आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।
भरत तिवारी मामले में न्याय की लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सच्चाई और कानून के अनुसार न्याय सुनिश्चित करने की मांग है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस मामले में सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच होगी और न्यायालय के माध्यम से उचित फैसला सामने आएगा।
भरत तिवारी मामले में अब सबसे बड़ी उम्मीद यही है—सच्चाई सामने आए, कानून अपना काम करे और पीड़ित पक्ष को न्याय मिले।
#ब्राह्मणबाबा #ब्राह्मण_बाबा