कौन है दिमागी नक्सल... सुधांशु त्रिवेदी ने बताया.
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सांसद ने वीडियो बनाकर बटोरी सुर्खियां.... पेट्रोल और एथेनॉल में बताया फर्क.
#एथेनॉल
मोदी की GenZ से जीवन में शॉर्टकट ना अपनाने की अपील.
#मोदी
पीएम मोदी की अपील, 15 अगस्त पर हर घर लहरायें तिरंगा.
#तिरंगा
रांची- छात्र आंदोलन
Unpopular Openion-
हालांकि ये thought आंदोलन के समय भी जेहन में था पर डर के मारे लिखा नहीं। कोई कितना भी निडर क्यों नहीं हों... भीड़ से डरता ही है और डरना भी चाहिए.
GenZ आंदोलन के समय डिजिटल प्लेटफॉर्म के जिन लोगों को स्टूडेंट्स ने अपना सपोर्टर समझा उनके लिए दरसल आंदोलन एक मौका था... मौका अपनी रीच बढ़ाने का.... मौका अपने फॉलोअर और सब्सक्राइबर बढ़ाने का... मौका अपने लिए परमानेंट ग्राहक बटोरने का.
दरअसल ये उनके लिए एक कार्निवल था... जैसा अक्सर आप Amazon और फ्लिपकार्ट पर देखते हैं.... उनको भी यहां फॉलोअर और सब्सक्राइबर कई आकर्षक ऑफर्स के साथ मिले। युवाओं की समस्या, एजुकेशन सिस्टम को दुरुस्त करने जैसी बातों से उनका कोई लेना- देना नहीं। युवा भले ही सड़क पर था पर इन डिजिटल क्रांतिकारियों ने अपने बच्चों की प्राइवेट एजुकेशन का बेहतरीन इंतजाम कर लिया....जिनके बच्चे पहले ही पढ़ लिए उनके लिए ये रिटायरमेंट प्लानिंग था.
आंदोलन में जो गाली - गलौच को भर भर के दिखाया गया वो दरसल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर खुद को बेचने की उनकी स्ट्रैटिजी थी। अक्सर OTT प्लेटफार्म पर जिस सीरीज में जितनी ज्यादा गाली होती हैं उसको उतनी ही पॉपुलेरिटी मिलती है। यही स्ट्रेटजी यहां भी अपनाई गई। उस पर ये तर्क की GenZ ऐसे ही बात करते हैं...ये गले से नहीं उतरता। गाली तो अक्सर लोग देते ही हैं पर उसका ब्रॉडकास्ट होते पहले बार देखा.
इन सब पर 'cherry on the cake' का काम किया केंद्र में बैठी सरकार ने। क्योंकि सरकार उनकी गोत्र की नहीं थी तो आंदोलन में दी जा रही गाली को प्लेटफार्म पर दिखा कर कई लोगों ने अपना मन की शांति को प्राप्त किया है। देना वो भी चाहते थे पर दे नहीं पा रहे थे... इसलिए जो दे रहा था उसके सारथी बन गये। बहुत दुखद है पर अपने देश में पेपर लीक पहले भी हुए... उससे बड़ा दुख की आज भी हो रहे हैं... और सबसे बड़ा दुख की आगे भी होते रहने की संभावना है। पर आंदोलन हर समय नहीं होगा और सब जगह भी नहीं होगा ये तय है.
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23/07/2026
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